साल था 2016। दुनिया में ज्यादातर लोग आईफोन 7 और गैलेक्सी एस7 एज जैसे फोन खरीद रहे थे। उनकी कीमत थी 50 से 70 हजार रुपये। तभी एक ऐसा फोन आया जिसने सबको चौंका दिया। उसकी कीमत थी 14,000 डॉलर यानी करीब 11 लाख रुपये से भी ज्यादा। बस एक फोन। न तो सोना था उसमें, न ही हीरे जड़े थे। बस एक साधारण दिखने वाला काला स्मार्टफोन था। नाम था सोलारिन। और इसे बनाया था सिरिन लैब्स नाम की एक कंपनी ने।
आज उस कंपनी का नाम लगभग गुमनाम हो चुका है। लेकिन सुरक्षा और ब्लॉकचेन के शौकीनों के बीच आज भी इसकी चर्चा होती है। आइए इस कंपनी के उत्थान और पतन की पूरी कहानी समझते हैं।
पहला अध्याय: सिरिन लैब्स का जन्म और मिशन
सिरिन लैब्स एक इज़राइली-स्विस कंपनी थी। इसकी नींव 2013 में रखी गई थी। संस्थापकों में केनेस रकिशेव, मोशे होगेग और ताल कोहेन जैसे नाम शामिल थे। इन लोगों ने एक साफ-साफ लक्ष्य रखा था। दुनिया का सबसे सुरक्षित स्मार्टफोन बनाना था उनका सपना। वो ऐसा फोन बनाना चाहते थे जिसे कोई हैक न कर सके, जिसमें कोई चोरी छुपे न हो।
यह सपना इतना बड़ा था कि इसे पूरा करने के लिए पहले 25 मिलियन डॉलर यानी करीब 200 करोड़ रुपये जुटाए गए। फिर अप्रैल 2016 में 72 मिलियन डॉलर और जोड़े गए। कुल मिलाकर करीब 800 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड जुटाया गया था।
दूसरा अध्याय: सोलारिन – 11 लाख का आम दिखने वाला फोन
मई 2016 का महीना था। सिरिन लैब्स ने अपना पहला फोन उतारा। नाम था सोलारिन। कीमत थी 9,500 पाउंड यानी 14,000 डॉलर से भी ज्यादा। भारतीय रुपयों में यह रकम लगभग 11.5 लाख के करीब बैठती थी। इस कीमत पर उस समय एक सेकेंड हैंड कार आ जाती थी। फिर भी सिरिन लैब्स को भरोसा था कि लोग इस फोन को खरीदेंगे।
कैसा दिखता था सोलारिन?
देखने में यह बिल्कुल साधारण फोन था। कोई चमक-दमक नहीं थी। यह कार्बन फाइबर और टाइटेनियम जैसी मजबूत सामग्री से बना था। स्वीडन में इसका डिजाइन तैयार किया गया था। फोन का वजन 243 ग्राम था। यानी आज के फोल्डेबल फोन जितना भारी था। हाथ में लेते ही पता चल जाता था कि यह कोई साधारण फोन नहीं है।
तकनीकी विशेषताएं (स्पेसिफिकेशन)
यह 5.5 इंच का फोन था। उस समय यह सामान्य आकार था। डिस्प्ले क्वाड एचडी था यानी 2560 गुणा 1440 पिक्सल का रिजॉल्यूशन। इसमें क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 810 प्रोसेसर लगा था। यह वही प्रोसेसर था जो उस साल कई फोन्स में आया था और अपनी गर्मी के लिए बदनाम था। रैम 4 जीबी की थी। स्टोरेज 128 जीबी का दिया गया था जिसे बढ़ाया नहीं जा सकता था।
पीछे की तरफ 23.8 मेगापिक्सल का कैमरा था। सामने सेल्फी के लिए 8 मेगापिक्सल का कैमरा था। बैटरी 4,040 एमएएच की थी। उस समय यह बहुत बड़ी बैटरी मानी जाती थी।
असली खूबी थी इसकी सुरक्षा
सोलारिन की कीमत उसके कैमरे या प्रोसेसर की वजह से नहीं थी। असली दम था उसकी सुरक्षा व्यवस्था में।
पहली चीज थी फिजिकल सिक्योरिटी स्विच। फोन के पीछे की तरफ एक भौतिक बटन लगा था। जैसे ही आप उसे सरकाते थे, फोन का सुरक्षा कवच मोड ऑन हो जाता था। यह एक तरह का सुपर-सिक्योर मोड था जो दुनिया के किसी भी दूसरे फोन में नहीं था।
दूसरी चीज थी मिलिट्री-ग्रेड एन्क्रिप्शन। जब सुरक्षा मोड ऑन होता था, तो सारी कॉल्स और मैसेजेस 256-बिट एईएस तकनीक से एन्क्रिप्ट हो जाते थे। यह वही तकनीक है जो दुनिया की सेनाएं अपने गुप्त संदेशों के लिए इस्तेमाल करती हैं।
तीसरी चीज थी साइबर अटैक से सुरक्षा। फोन में जिम्पीरियम नाम की कंपनी का सॉफ्टवेयर लगा था। यह हर पल फोन पर नजर रखता था। अगर कोई हैकर फोन में घुसने की कोशिश करता, तो यह तुरंत अलर्ट कर देता था।
चौथी चीज थी रिमोट वाइप की सुविधा। अगर फोन चोरी हो जाता या खो जाता, तो फोन के मालिक दूर बैठे ही पूरे फोन का सारा डाटा मिटा सकते थे। चोर के हाथ कुछ नहीं लगता था।
तीसरा अध्याय: फिनी – ब्लॉकचेन का सपना लेकर आया फोन
सोलारिन भले ही सुरक्षा के मामले में कमाल का था, लेकिन इतनी ऊंची कीमत पर यह आम लोगों की पहुंच से बाहर था। कुछ ही अमीर लोगों ने इसे खरीदा। सिरिन लैब्स को समझ में आ गया कि अब कुछ और करना होगा। उन्होंने 2018 में अपना दूसरा फोन लॉन्च किया। नाम रखा फिनी।
इस बार का टारगेट थे क्रिप्टोकरेंसी के दीवाने लोग। बिटकॉइन और एथेरियम जैसी डिजिटल करेंसी का इस्तेमाल करने वालों के लिए यह फोन बनाया गया था। सिरिन लैब्स ने इसे दुनिया का पहला ब्लॉकचेन स्मार्टफोन कहा।
फिनी की अनोखी खूबियां
फिनी की सबसे बड़ी खासियत थी उसकी स्लाइडिंग स्क्रीन। फोन के पीछे की तरफ एक छोटी सी दूसरी स्क्रीन छुपी होती थी। जरूरत पड़ने पर उसे सरका कर बाहर निकाला जा सकता था। इसी छोटी स्क्रीन पर आप अपने क्रिप्टो वॉलेट को एक्सेस करते थे। यह वॉलेट पूरी तरह ऑफलाइन रहता था यानी इंटरनेट से कनेक्ट नहीं होता था। हैकर्स के लिए इसे चोरी करना नामुमकिन था।
फोन में एंड्रॉयड पर बेस्ड एक अलग ऑपरेटिंग सिस्टम था जिसे शील्ड ओएस कहा गया। इसमें एक अलग ऐप स्टोर भी था जहां से ब्लॉकचेन से जुड़े ऐप्स डाउनलोड किए जा सकते थे।
फिनी की कीमत
फिनी की कीमत केवल 999 डॉलर रखी गई थी। भारतीय रुपयों में यह करीब 70,000 के आसपास बैठती थी। सोलारिन से यह काफी सस्ता था। इतना सस्ता दाम रखने के पीछे एक बड़ी वजह थी। इस फोन को बनाने वाली कंपनी थी फॉक्सकॉन। यह वही कंपनी है जो आईफोन को असेंबल करती है। फॉक्सकॉन के साथ काम करके सिरिन लैब्स ने कीमत कम रखने की कोशिश की थी।
चौथा अध्याय: सिरिन लैब्स कहां गायब हो गई?
इतनी दमदार तकनीक होने के बावजूद आज इस कंपनी का नाम तक मशहूर नहीं है। ऐसा क्यों हुआ? इसके कई कारण थे।
पहला और सबसे बड़ा कारण थी बिक्री। सोलारिन फोन की कीमत इतनी आसमानी थी कि पहले साल में इसकी केवल 700 से 750 यूनिट्स ही बिक पाईं। कुल मिलाकर करीब 10 मिलियन डॉलर यानी 80 करोड़ रुपये का राजस्व आया। एक स्मार्टफोन कंपनी के लिए यह बेहद कम आंकड़ा था।
दूसरा कारण था क्रिप्टो मार्केट का गिरना। फिनी फोन 2018 में आया। यह वह समय था जब बिटकॉइन और दूसरी क्रिप्टोकरेंसी का बाजार धीरे-धीरे ठंडा पड़ रहा था। जिन लोगों के लिए फोन बनाया गया था, उनमें भी इसके लिए उतना उत्साह नहीं था।
तीसरा कारण था एसआरएन टोकन का कम हो जाना। फिनी फोन को खरीदने के लिए सिरिन लैब्स के अपने एसआरएन टोकन की जरूरत होती थी। लेकिन क्रिप्टो बाजार की मंदी के कारण एसआरएन की कीमत बुरी तरह गिर गई। साल 2018 में जहां यह 3.79 डॉलर के उच्च स्तर पर था, वहीं आज यह 0.0002 डॉलर यानी एक पैसे के दसवें हिस्से पर आ गया है।
चौथा कारण था कर्मचारियों की छंटनी। साल 2017 में कंपनी ने बदलती दिशा को देखते हुए अपने एक-तिहाई कर्मचारियों को हटा दिया था। यह एक चेतावनी थी कि कंपनी मुश्किल दौर से गुजर रही है।
पांचवा अध्याय: क्या आज इन फोन्स में कोई दम है?
अगर आज कोई व्यक्ति सोलारिन या फिनी खरीदना चाहता है, तो वह केवल सेकेंड हैंड या रिफर्बिश्ड मार्केट में ही मिलेगा। भारत में कभी-कभार ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर सोलारिन 7,999 रुपये जैसी कम कीमत पर भी बिकता देखा गया है। लेकिन इसकी उपलब्धता बहुत कम है।
सवाल यह है कि क्या ये फोन आज काम के हैं? शायद नहीं। क्योंकि:
सोलारिन अभी भी एंड्रॉयड 5.1 पर चलता है। फिनी एंड्रॉयड 8.1 पर। आज के ज्यादातर ऐप्स इतने पुराने एंड्रॉयड वर्जन को सपोर्ट नहीं करते। न तो व्हाट्सएप ठीक से चलेगा, न इंस्टाग्राम, न ही कोई बैंकिंग ऐप।
हार्डवेयर भी पुराना पड़ चुका है। 2016 का प्रोसेसर और 4 जीबी की रैम आज के 8,000 रुपये वाले फोन से भी कमजोर है। बैटरी भी अब उतना बैकअप नहीं देगी जितना नए में देती थी।
अंतिम सत्य: सिरिन लैब्स की असली विरासत
सिरिन लैब्स एक दिलचस्प कहानी है। यह उस कंपनी की कहानी है जिसने सुरक्षा को हर चीज से ऊपर रखा। उसने ऐसे फोन बनाए जो दुनिया के किसी भी दूसरे फोन से ज्यादा सुरक्षित थे। लेकिन क्या केवल सुरक्षा काफी थी? नहीं। सही समय, सही कीमत, और सही ग्राहक – इन तीनों का मेल न होने के कारण यह कंपनी अपने सपने को पूरा न कर सकी।
आज सिरिन लैब्स के फोन सिर्फ कलेक्टर्स के लिए हैं। जिन्हें रेट्रो या अनोखी टेक्नोलॉजी जमा करने का शौक है, उनके लिए सोलारिन या फिनी एक अनमोल पीस है। लेकिन रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए? बिल्कुल नहीं।
सिरिन लैब्स की कहानी हर उस उद्यमी के लिए एक सबक है जो कुछ नया बनाना चाहता है। अच्छा प्रोडक्ट बनाना ही सब कुछ नहीं है। उसे सही लोगों तक सही कीमत पर पहुंचाना भी उतना ही जरूरी है। सिरिन लैब्स ने प्रोडक्ट तो बेहतरीन बनाया, लेकिन वह उसे दुनिया के सामने रखने का सही तरीका नहीं ढूंढ पाई।